झूठा शपथपत्र देने वाले डॉक्टरों पर कसेगा शिकंजा
Gorakhpur News - -पैसे लेकर अस्पतालों के पंजीकरण में डाक्टर दे रहे डिग्री और शपथपत्र -अर्पित हास्पिटल
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गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता पहले सत्यम और अब अर्पित हॉस्पिटल। अप्रशिक्षितों के इलाज की वजह से एक गर्भवती की मौत हो गई जबकि बच्चे को ऐसे हाल में पहुंचा दिया गया कि उसे भी बचा नहीं जा सका। दोनों अस्पतालों को जिन डॉक्टरों की डिग्री पर मान्यता मिली थी वे यहां प्रैक्टिस ही नहीं करते थे जबकि उन्होंने इन अस्पतालों में सेवा देने का शपथपत्र सीएमओ कार्यालय में जमा कराया था। मामला पुलिस में आने के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। इन खुलासों के बाद स्वास्थ्य विभाग भी कठघरे में है।
द अर्पित हॉस्पिटल के प्रकरण में जिस डॉक्टर की डिग्री लगाई गई थी वह चर्चा के केन्द्र में है। राजघाट के हांसूपुर निवासी डॉ. साकिब सलीम की डिग्री पर हॉस्पिटल का पंजीकरण था, लेकिन डॉक्टर की यहां एक दिन भी लोकेशन नहीं मिली। डॉक्टर साकिब बिहार में अपनी पत्नी के साथ न सिर्फ पीजी कर रहा था बल्कि बेतिया में हॉस्पिटल भी चला रहा था। अर्पित हॉस्पिटल में डिग्री लगाने के बदले डॉक्टर को एक लाख रुपये मिले थे और चालीस हजार रुपये महीने मानदेय देने को कहा गया था। जबकि डॉक्टर ने शपथपत्र देकर बताया था कि वह द अर्पित हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहा है। पुलिस के मुताबिक मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) की लोकेशन से पता चला कि वह यहां एक बार भी नहीं आया। डॉ. साकिब सलीम की ससुराल बिहार के बेतिया में है। साकिब की पत्नी शाहिना भी डॉक्टर हैं। डॉ. साकिब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। अक्टूबर 2024 में डिग्री मिलने के बाद अपनी डिग्री अर्पित हॉस्पिटल के पंजीकरण में लगवाने के साथ शपथपत्र भी दिया था।
डॉ. सुनील रहते थे दिल्ली, गोरखपुर में उनके नाम चल रहा था सत्यम
2023 में सामने आए सत्यम हॉस्पिटल में भी इसी तरह डॉक्टर सुनील कुमार सरोज की डिग्री लगाई गई थी, जबकि वह दिल्ली में रहते थे। नर्सिंगहोम पंजीकरण के नोडल अधिकारी डा. अनिल कुमार सिंह ने हास्पिटल संचालक सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस केस में चार्ज शीट भी दाखिल हो चुकी है।
अर्पित के संचालक डा. प्रवीण को रिमांड पर लेगी पुलिस
एडिशनल सीएमओ द्वारा दर्ज कराए गए केस में डा. साकिब सलीम के साथ ही हॉस्पिटल संचालक प्रवीण को भी आरोपित बनाया गया है। इस मामले में अब डा. प्रवीण को गुलरिहा पुलिस रिमांड पर लेगी। डा. प्रवीण वर्तमान में जेल में है। उस पर मरीज की खरीद-फरोख्त के आरोप में मुकदमा दर्ज है। उसी सिलसिले में जांच आगे बढ़ी तब पता चला कि जिस डॉक्टर के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया गया था, वह तो यहां आता ही नहीं था।
जहां के लिए शपथपत्र दिया वहां ही सेवा दें डॉक्टर
पुलिस अफसरों का कहना है कि हास्पिटल के पंजीकरण में अपनी डिग्री और शपथपत्र देने वाले डॉक्टरों को उसी अस्पताल में सेवा देनी होगी। दूसरी जगह प्रैक्टिस या अस्पताल चलाने की शिकायत आने पर आरोप जांच में पुष्ट हुए तो कार्रवाई तय है। अगर किसी डॉक्टर को लगता है कि उसकी डिग्री का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया गया है तो वह खुद मुकदमा दर्ज करा सकता है।
अर्पित हॉस्पिटल के पंजीकरण और अप्रशिक्षत डॉक्टर से इलाज के मामले में दर्ज एफआईआर में हॉस्पिटल संचालक प्रवीण को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। मरीज-खरीद फरोख्त के मामले में प्रवीण जेल में है। जांच के क्रम में ही अप्रशिक्षत डॉक्टरों से इलाज का नया मामला सामने आया और स्वास्थ्य विभाग की टीम के रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज किया गया है।
अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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