तत्कालीन नगर डीएसपी राम नरेश पर विभागीय कार्यवाही शुरू
मुजफ्फरपुर के तत्कालीन नगर डीएसपी राम नरेश पासवान पर सुजीत दास के अपहरण मामले में एक साल तक पर्यवेक्षण न करने के आरोप में विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। गृह विभाग ने उन्हें 15 दिन में लिखित जवाब...

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। तत्कालीन नगर डीएसपी राम नरेश पासवान पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। वह अभी बीएमपी-15 के सुपौल मुख्यालय में पोस्टेड हैं। आरोप है कि वर्ष 2020 में ब्रह्मपुरा से गायब पश्चिम बंगाल के मजदूर सुजीत दास के केस में राम नरेश पासवान ने एक साल से अधिक पर्यवेक्षण नहीं किया। इससे एक साल तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुजीत दास के गायब हुए पांच साल बीत गए है। शुरुआती जांच नहीं होने से मामला अटक गया। अब मुख्यालय ने सुजीत दास के संबंध में सुराग देने वाले को तीन लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
गृह विभाग ने राम नरेश पासवान पर आरोप गठन और विभागीय कार्यवाही शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसे विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। गृह विभाग के उपसचिव विनोद कुमार दास ने अधिसूचना में निर्देश दिया है कि राम नरेश पासवान अपने उपर लगे आरोपों के संबंध में 15 दिन में लिखित जवाब दें। यह भी बताए कि क्या वे साक्षात सुनवाई चाहते हैं। वह साक्ष्य भी प्रस्तुत करें जो वह आरोपों के संबंध में बचाव के रूप में देना चाहते हैं। यदि 15 दिनों के अंदर राम नरेश पासवान जवाब नहीं देंगे तो उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी। बीएमपी 15 के कमांडेंट से आग्रह किया गया है कि राम नरेश पासवान को वह अपने स्तर से आरोप पत्र और उसके सापेक्ष साक्ष्य व प्रदर्श तामिला कराकर गृह विभाग को भेजे।
पश्चिम बंगाल से मां व तीन बेटे आए थे मजदूरी के लिए :
ब्रह्मपुरा थाना में पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के हिली बैकुंठपुर निवासी सेफाली दास ने पुत्र सुजीत के अपहरण की 26 नवंबर 2020 को एफआईआर कराई थी। पुलिस को बताया था कि वह अपने तीन बेटों के साथ मजदूरी के लिए ठेकेदार अजिराउल के माध्यम से एमआईटी कॉलेज आई थी। 15 नवंबर 2020 को ठेकेदार का मुंशी वीरेंद्र कुमार उसके पुत्र सुजीत को काम के लिए बुलाकर बीबीगंज ले गया था। जब सुजीत वापस नहीं आया तो मुंशी से सेफाली ने जानकारी ली। उसने कहा कि बीबीगंज में उसका पुत्र नहीं है। सेफाली 26 नवंबर 2020 तक शहर में बेटे की तलाश में भटकती रही। तब उसके आवेदन पर ब्रह्मपुरा थाने में सुजीत के अपहरण की एफआईआर दर्ज हुई।
खुशी अपहरण कांड में भी हाईकोर्ट में उठा था सवाल :
ब्रह्मपुरा के खुशी अपहरण कांड में भी लापरवाही को लेकर डीएसपी राम नरेश पासवान पर हाईकोर्ट में सवाल उठा था। खुशी अपहरण कांड में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। केस डायरी में तत्कालीन थानेदार ने लिखा था कि खुशी को वापस लाने के लिए एक लाख रुपये का ऑफर देने वाले को थाना हाजत से ही छोड़ दिया गया। इसको हाईकोर्ट ने गंभीर चूक मानते हुए डीएसपी व आईओ की भूमिका की जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया था। हालांकि, अब तक हाईकोर्ट के आदेश पर मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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